महान व्यक्तियों के दिए उपदेश 2023 हिंदी भाषा में, Sermons given by great persons 2023 in Hindi language
देखते समय सिर्फ देखें, सुनते समय केवल सुनें, महसूस करते समय सिर्फ महसूस करें, और सोचते समय केवल सोचें, यही वास्तविक कर्म है। - गौतम बुद्ध
किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि अपना काम करें, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े।
- महाभारत
विरासत पिता से नहीं मिलती, बल्कि विरासत खुद की काबिलियत से हासिल करनी पड़ती है।
- शाहू महाराज
यास्य यल्लक्षणं प्रोक्तं पुंसो वर्णाभिव्यञ्जकम् । यदन्यत्रापि दृश्येत तत्तेनैव विनिर्दिशेत् ॥
अर्थात् जिसके लक्षण उत्तम पुरुष के रूप में कहे गए हैं, उसकी पहचान करने में यदि कहीं भी संदेह हो, तो उसके पहचान का माप उसी लक्षण से करना चाहिए ॥
- मनुस्मृति
एक अच्छी किताब सौ अच्छे दोस्तों के बराबर होती है, लेकिन एक अच्छा दोस्त पूरे पुस्तकालय के बराबर होता है।
- डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
जो दान कर्तव्य समझकर, बिना किसी संकोच के, किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जाए, वह सात्विक माना जाता है।
॥ श्रीमद्भगवद्गीता ॥
कुछ लोग सोचते हैं कि धर्म समाज के लिए आवश्यक नहीं है मैं यह दृष्टिकोण नहीं रखता मैं धर्म की नींव को समाज के जीवन और प्रथाओं के लिए आवश्यक मानता हूं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकर
निरुत्साहस्य दीनस्य शोकपर्याकुलात्मनः । सर्वार्था व्यवसीदन्ति व्यसनं चाधिगच्छति ॥
अर्थात उत्साह हीन, दीन और शोकाकुल से मनुष्य के सभी काम बिगड़ जाते हैं, वह घोर विपत्ति में फंस जाता है।
- रामायण
हर कष्ट एक सबक देता है और हर सबक व्यक्ति को बदल देता है ।
- डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
जंगल की आग चंदन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात् दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकता है।
- आचार्य चाणक्य
उदास, निराश या हतोत्साहित ना होना हर तरह की समृद्धि और खुशी का आधार है
रामायण
यस्य कृत्यं न विघ्नन्ति शीतमुष्णं भयं रतिः । समृद्धिरसमृद्धिर्वा स वै पण्डित उच्यते ॥
अर्थात
जो व्यक्ति सर्दी-गर्मी, अमीरी-गरीबी, प्रेम-घृणा इत्यादि विषम परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता और तटस्थ भाव से अपना राजधर्म निभाता है, वही सच्चा ज्ञानी है । -
- विदुर नीति
आपको धर्मपुस्तक, देवालय और प्रार्थना की कोई आवश्यकता नहीं, यदि आपने अहंकार त्याग दिया है।
- स्वामी विवेकानंद
अपनी इच्छाएं कम करके आप वास्तविक शांति प्राप्त कर सकते हैं ।
1 • महात्मा गाँधी
आत्म-ज्ञान की तलवार से अपने हृदय के अज्ञान को काटकर मन से संदेह को अलग कर दो।
• श्रीमद्भगवद्गीता
यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति । तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ।।
अर्थात
श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन जब तुम्हारी बुद्धि इस मोह माया के घने जंगल को पार कर जाएगी तब सुना हुआ या सुनने योग्य सब कुछ से तुम विरक्त हो जाओगे ।
श्रीमद्भगवद्गीता
संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं और ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं ।
- स्वामी विवेकानंद
दीपक का थोड़ा-सा प्रकाश बहुत से अंधेरे को नष्ट कर देता है ।
- आत्मबोधपनिषद्
धर्मान्न प्रमदितव्यम् ॥
धर्म का आचरण करो । धर्म से कभी नहीं डिगना चाहिए ।
- उपनिषद
आपकी दिनचर्या आपकी अंतरात्मा का प्रतिबिंब होती है ।
- महात्मा गांधी
अच्छा दिखने के लिए नहीं अच्छा बनने के लिए जियो ।
. बी. आर. अंबेडकर
किसी एक मनुष्य को स्वतंत्र राज्य का अधिकार कभी न दें परन्तु राज्य के समस्त कार्यों को शिष्ट जन की सभा के अधीन रखें।
- ऋग्वेद
जातिगत और लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करना महापाप है।
- महात्मा ज्योतिबा फुले
उत्साह- उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम् । सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चदपि दुर्लभम् ॥
अर्थात
उत्साह बड़ा बलवान होता है; उत्साह से बढ़कर कोई बल नहीं है । उत्साही पुरुष के लिए संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है । - वाल्मीकि, रामायण
समय और शब्दों का प्रयोग लापरवाही से न करें, क्योंकि ये दोनों न दोबारा आते हैं न मौका देते हैं।
- गौतम बुद्ध
सद्बुद्धि ही संसार में सर्वश्रेष्ठ वस्तु है जिसने अपनी विचारधारा की शुद्धि कर ली उसने सब कुछ प्राप्त कर लिया।
- अथर्ववेद
च एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्। उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते ॥
अर्थात
जो इस जीवात्मा को मारने वाला समझता है और जो इसको मरा समझता है वे दोनों ही नहीं जानते हैं, क्योंकि यह आत्मा न मरता है और न मारा जाता है।
श्रीमद्भगवद्गीता
इस मिट्टी में कुछ अनूठा है, जहां कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास रहा है ।
- सरदार वल्लभभाई पटेल
सही कर्म वह नहीं है जिसके परिणाम हमेशा सही हों, अपितु सही कर्म वह है जिसका उद्देश्य कभी गलत ना हो ।
- श्रीमद्भगवद्गीता
हमें अधीर नहीं होना चाहिए। न ही यह आशा करनी चाहिए कि जिस प्रश्न का उत्तर खोजने में न जाने कितने ही लोगों ने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया, उसका उत्तर हमें एक-दो दिन में प्राप्त हो जाएगा।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस
उत्साहवन्तो हि नरा न लोके सीदन्ति कर्मस्वतिदुष्करेषु ॥
अर्थात
उत्साही मनुष्य संसार में अत्यंत कठिन कार्य में भी दुःखी नहीं होता ।
- अरण्यकाण्ड, वाल्मिकी रामायण
संसार में कोई भी मनुष्य सर्वगुण सम्पन्न नहीं होता, इसलिए कुछ कमियों को नज़रअंदाज़ करके रिश्ते बनाए रखिए ।
- श्रीमद्भगवद्गीता
कोई बाहरी ताकत इन्सान को नीचे नहीं गिरा सकती अपने को निचे गिराने वाला इन्सान खुद ही है।
- महात्मा गाँधी
यस्य स्नेहो भयं तस्य स्नेहो दुःखस्य भाजनम् । स्नेहमूलानि दुःखानि तानि त्यक्त्वा वसेत्सुखम् ॥
अर्थात
जिससे स्नेह होता है, उसी का डर भी लगा रहता है । स्नेह ही दुःख का आधार है। स्नेह ही दुःख का मूल है। स्नेह को त्यागकर ही व्यक्ति सुख से रह सकता है ।
- चाणक्य नीति
विवेकी मनुष्य को पाकर गुण सुंदरता को प्राप्त होते हैं।
• आचार्य चाणक्य
जिसने अपनापन खोया, उसने सब खोया । "
- स्वामी विवेकानंद
कभी-कभी समय के फेर से मित्र शत्रु बन जाता है और शत्रु भी मित्र हो जाता है, क्योंकि स्वार्थ बड़ा बलवान है ।
-महाभारत
विद्या लाभ विद्यालय के ऊपर नहीं, मुख्यतः छात्र के ऊपर निर्भर करता है।
–रविंद्र नाथ टैगोर
न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षय । शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः ॥
अर्थात्
जो न तो सांसारिक सुखों में हर्षित होते हैं
और न ही सांसारिक दुखों में निराश होते हैं,
जो न तो किसी हानि के लिए शोक करते हैं और न ही किसी लाभ के लिए लालायित रहते हैं, जो अच्छे और बुरे दोनों कर्मों का त्याग करते हैं, ऐसे भक्ति से भरे हुए व्यक्ति मुझे बहुत प्रिय हैं।
• श्रीमद्भभगवदगीता
समाज के निम्न वर्ग तब तक बुद्धि, नैतिकता, प्रगति और समृद्धि का विकास नहीं करेंगे जब तक वे शिक्षित नहीं होंगे।
- महात्मा ज्योतिबा फुले
केवल अपने लिए माँगनेवाला भिखारी कहलाता है, सबके लिए माँगनेवाला साधु कहलाता है।
• महादेवी वर्मा
एक प्रकार के विचार रखो, एक समिति में संगठित रहो । विचारों की एकता और संगठन से एक प्रचंड शक्ति उत्पन्न होती है । .
ऋग्वेद
धन, शक्ति और दक्षता केवल जीवन के साधन हैं ख़ुद जीवन नहीं ।
• सर्वपल्ली राधाकृष्णन
चिंता कभी भी कल का दुःख नहीं छीनती वह केवल आज का आनंद छीन लेती है।
- गौर गोपाल दास
बुरे इरादों के साथ किया गया अच्छा कार्य भी अनिवार्य रूप से असफलता का कारण बनता है ।
- यजुर्वेद
यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे । कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते ॥
अर्थात
दूसरे लोग जिसके कार्य, व्यवहार, गोपनीयता, सलाह और विचार को कार्य पूरा हो जाने के बाद ही जान पाते हैं, वही व्यक्ति ज्ञानी कहलाता है। || विदुर नीति |
लड़ाई हमेशा दो तरह की होती है एक अन्याय के खिलाफ और दूसरा अपनी कमजोरी के खिलाफ ।
- सरदार वल्लभभाई पटेल
जिसके द्वारा किसी को कष्ट नहीं होता और जो किसी से विचलित नहीं होता जो सुख-दुःख, भय और चिन्ता में समभाव रखता है, वह मुझे प्रिय है।
- श्रीमद्भगवद्गीता
जिस व्यक्ति के साथ सबसे अच्छे विचार होते हैं वह व्यक्ति कभी अकेला नहीं होता ।
- स्वामी विवेकानंद
सर्वमन्यत्परित्यज्य शरीरमनुपालयेत् । तदभावे हि भावानां सर्वाभावः शरीरिणाम्॥
अर्थात
बाकी सब छोड़ कर अपने शरीर का खयाल रखना चाहिए। शरीर (स्वास्थ्य) के अभाव से प्राणियों में सभी चीज़ों का अभाव होता है।
- चरक संहिता
लोग आपको इज्जत देंगे जब आप ख़ुद पर जीत हासिल कर लेंगे।
- महात्मा बुद्ध
"अपने आखों को हमेशा आसमान की तरफ रखो और अपने पैरों को हमेशा ज़मीन पर |
रामायण
जिसमें दया नहीं, धर्म नहीं, निज भाषा से प्रेम नहीं, चरित्र नहीं, आत्मबल नहीं है, वह भी कोई व्यक्ति नहीं है।
–मुंशी प्रेमचंद
न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः । यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ॥
अर्थात्
एक देहधारी प्राणी सभी कर्मों को नहीं त्याग सकता। परन्तु जो कर्मफल का त्याग कर देता है, वह सच्चा त्यागी कहलाता है। . श्रीमद्भगवद्गीता
अपने आदर्श को पाने के लिए सैकड़ों बार असफल होने पर भी आगे बढ़ो।
- स्वामी विवेकानंद
अगर किसी व्यक्ति से भूतकाल में कोई भूल हो तो उसे अपने वर्तमान को सुधारकर अपने भविष्य को अच्छा बनाना चाहिए।
• रामायण
मोह उसी का करो जिस पर आपका अधिकार है, . जिस पर आपका अधिकार ही नहीं है, उसका मोह भी नहीं करना चाहिए ।
- श्रीमद्भगवद्गीता
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥
अर्थात्
जो खाने, सोने, आमोद-प्रमोद तथा काम करने की आदतों में नियमित रहता है, वह योगाभ्यास द्वारा समस्त भौतिक क्लेशों को नष्ट कर सकता है।
- श्रीमद्भगवद्गीता
हार मत मानो, हमेशा अगला मौका ज़रूर आता है।
• मैरी कॉम
सहनशील
होना अच्छी बात है, पर अन्याय का विरोध करना उससे भी उत्तम है । - जयशंकर प्रसाद
जो अधर्माचरण से युक्त हिंसक मनुष्य है, उसको धन, राज्यश्री और उत्तम सामर्थ्य प्राप्त नहीं होता इसलिए सबको न्याय के आचरण से ही धन खोजना चाहिए ।
- श्रीमद्भगवद्गीता
यत्कर्म कल्वा कुर्वंश्च करिष्यंश्चैव लज्जति । तज्ज्ञेयं विदुषा सर्वं तामसं गुणलक्षणम् ॥
अर्थात
जो कर्म करने के पश्चात, करते हुए या करने से पहले शर्म आए ऐसे सभी कर्म तामसिक माने गए हैं। - मनुस्मृति
Conclusion:
हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी आशा करता हूं आप अच्छे से होंगे लेकर आया हूं आपके लिए यह नया पोस्ट शायद आपने पोस्ट मेरी पूरी होगी अब जल्दी से कमेंट करके आप मुझे यही बता दे कि यह पोस्ट आपको कैसे और साथ ही साथ कमेंट में आप मुझसे यही बताएं कि अगली मोटिवेशनल आप मुझे सजेस्ट भी कर सकते हैं और अभी तक मेरे सपनों को फॉलो नहीं किया है तो प्लीज ऊपर राइट साइड में दिख रहे हैं मुझे फॉलो कर दीजिए और ऐसे ही मेरे ब्लॉक कोई बने रहिए मैं तेरी आपके लिए नहीं कोटेशन लेकर आता रहूंगा मेरी ब्लॉक को पढ़ने के लिए–
धन्यवाद






























































